मंगलवार, 26 जून, 2007

इस अंक में

इस अंक में
पर्यावरण डाइजेस्ट के इस अंक में पर्यावरण से जुडे विभिन्न मुद्दों पर विशेष जानकारी दी गयी है। पहले लेख पानी और सरकारी नीतियां में जलयोद्धा राजेन्द्रसिंह लिख रहे हैं कि हमारे देश में आसमान से यदि पानी की चार हजार बूंदें गिरती है तो हम उनमें से महज ६ सौ बूंदों का ही इस्तेमाल करते हैं । दिल्ली की प्रसिद्ध विज्ञान लेखिका सुश्री रेशमा भारती के लेख भारत ग्लोबल वार्मिंग का सामना कैसे करे ? में वे लिख रही हैं कि यह तभी संभव है , जब भूमण्डलीकरण की ताकतों द्वारा प्राकृतिक साधनों की खुली लूट व उसके चलते गांववासियों को उनके जल-जमीन-जंगल से वंचित किये जाने का सिलसिला थमेगा । जयपुर (राज.) के पत्रकार अशोक माथुर के लेख इंदिरा गांधी नहर से क्या सबक लें ? में श्री माथुर लिख रहे हैं कि इंदिरा गांधी नहर में हुए भ्रष्टाचार, लापरवाही व किसान व खेती विरोधी नीतियों से सबक लेने का समय आ गया है । मुंबई के प्रसिद्ध सर्वोदयी कार्यकर्ता टी.आर.के. सोमैया ने अपने लेख कहां जाए औरत ? में कहा है कि दुनियाभर की औरतें प्रतिदिन ६ लाख ४० हजार करोड का ऐसा श्रम करती हैं जिसका उन्हें भुगतान नहीं किया जाता है । सुप्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. चन्द्रशीला गुप्त के लेख अब के बरस भी न आये सारस में साइबेरियन सारस के भारत आने की संख्या में हो रही लगातार कमी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है । खास खबर में इस बार हमारे विशेष संवाददाता की रिपोर्ट बाघों को लेकर मंत्रालय और संस्थान में ठनी पढेंगें । कविता में इस बार रतलाम के शिक्षाविद् शिवकुमार दीक्षित की कविता प्रार्थना के स्वर आपको रूचिकर लगेगी । पत्रिका स्थायी स्तंभ पर्यावरण परिक्रमा, ज्ञान विज्ञान एवं पर्यावरण समाचार में आप देश दुनिया में पर्यावरण और विज्ञान के क्षेत्र में चल रही हलचलों से अवगत होते है। पत्रिका के बारे में आपकी राय से अवगत करायें।-कुमार सिद्धार्थ

1 टिप्पणियाँ:

Raviratlami ने कहा…

विपुल, आपको बधाई आपने कर दिखाया. :)