पर्यावरण डाइजेस्ट इस अंक में वन, वनवासी और जलवायु परिवर्तन पर विशेष सामग्री दी गयी है । पहले लेख सर एडमंड हिलेरी : प्रकृति पुत्र का अवसान में डॉ. खुशालसिंह पुरोहित ने सर एडमंड हिलेरी को श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं । दूसरे लेख नदियों की जिंदगी का सवाल में म.प्र. के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव लिख रहे हैं कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता नदियों को प्रदूषण एवं शोषण से बचाने की है । पेनांग (मलेशिया) स्थित थर्ड वर्ल्ड नेटवर्क के निदेशक मार्टिन खोर के लेख एक जटिल समस्या है, जलवायु परिवर्तन में वे सचेत कर रहे हैं कि बढ़ता तापमान आज का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है । सुप्रसिद्ध पत्रकार लेखक राजुकुमार लेख वन अधिकार कानून : अभी तो अंगड़ाई है में लिख रहे हैं कि १५० वर्षो के अन्याय के बाद पहली बार वनवासी समूह विस्थापित होने की यातना से थोड़ी राहत की उम्मीद कर रहा है । म.प्र. के वरिष्ठ वन अधिकारी जगदीश प्रसाद शर्मा के लेख दूध-दही की नदियों वाले देश में बिकता पानी में लिख रहे कि हमारे देश में धर्म, जाति, सम्प्रदाय आदि को भुलाकर केवल राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि रखते हुए आबादी नियंत्रण और वनक्षेत्र बढ़ाने हेतु कानून बनाना होगा । कविता में इस बार टीकमगढ़ (म.प्र.) के साहित्यकार राना लिधौरी के प्रकृति और पर्यावरण पर हाईकू आपको पसंद आएंगें इसी प्रकार विशेष लेख में दिल्ली स्थित लेखिका सुश्री रेशमा भारती का लेख जलवायु परिवर्तन और हम भी आपको रूचिकर लगेगा । पत्रिका के स्थायी स्तम्भ पर्यावरण परिक्रमा, ज्ञान-विज्ञान और पर्यावरण समाचार में पर्यावरण जगत मे हो रही नित-नयी हलचलों से आप रुबरु होते हैं । पत्रिका के बारे में अपने विचारों से हमें अवगत करायें ।
- कुमार सिद्धार्थ
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