सोमवार, 14 अप्रैल, 2008

इस अंक में

पर्यावरण डाइजेस्ट इस अंक में होली एवं विश्ववानिकी दिवस के अवसर पर विशेष सामग्री दी गयी है । पिछले दिनांे महान समाजसेवी बाबा आमटे का निधन हो गया । वरिष्ठ गांधीवादी पत्रकार कुमार प्रशंात के लेख बाबा आमटे : आस्था की इबारत में बाबा को मात्र श्रद्धांजलि भर नहीं है , बल्कि उन्हें समझने - समझाने का प्रयास भी है। श्रद्धांजलि स्वरूप कविता में इस बार बाबा की कविताएं भी दी गयी हैं । होेली के अवसर पर चंदौसी (मुरादाबाद) उ.प्र. के प्रध्यापक/लेखक डॉ. सुनील अग्रवाल के लेख संश्लेषित रंग, करते जीवन बदंरग में लिख रहे हैं कि रंगों को बनाने में भारी धातुआें का सर्वाधिक प्रयोग होता है, ये धात्विक रसायन हमारे स्वास्थ्य को अत्यधिक हानि पहुंचाते हैं । महिला दिवस के अवसर पर हरियाणा के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. रामनिवास यादव के लेख पर्यावरण संरक्षण और महिलाएँ में कहा गया है कि पर्यावरण संरक्षण के कार्योंा में महिलाआें को शामिले किये बिना इन योजनाआें का सफल होना संभव नहंी है । चिंतन एन्वायरमेंट रिसर्च एवं एक्शन ग्रुप दिल्ली की निदेशक भारती चतुर्वेदी अपने लेख कचरे को सोना बनाने की साजिश में कह रही हैं कि भारतीय नियोजकों द्वारा अपशिष्ट निपटान को संगठित व्यवसाय का हिस्सा बनाना न केवल खर्चीला है बल्कि वह गरीब विरोधी भी है । विशेष रिपोर्ट में इस बार डाउन टू अर्थ टीम की रिपोर्ट कोयला ऊर्जा और नई तकनीक आप पढ़ेंगें । इसके साथ ही विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. रामप्रताप गुप्त के लेख वन और जलवायु परिवर्तन तथा प्रसिद्ध वनस्पतिविद् डॉ. किशोर पंवार के लेख क्या पौधों को भी विटामिन चाहिए ? में आपको वनस्पति जगत के विभिन्न पहलुआें का परिचय प्राप्त् होगा । पत्रिका के स्थायी स्तम्भ पर्यावरण परिक्रमा, ज्ञान-विज्ञान और पर्यावरण समाचार मंे पर्यावरण जगत मे हो रही नित-नयी हलचलों से आप रुबरु होते हैं । पत्रिका के बारे में अपने विचारों से हमें अवगत करायें । - कुमार सिद्धार्थ

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