शुक्रवार, 15 मई 2009

८ कविता

वृक्ष
-डॉ. स्वदेश मलहोत्रा `रश्मि'
निस्वार्थ देते छाँवठाँव-ठाँवजाति भेद से परे ।कृष्ण का अनुरागी स्वाभाव से त्यागी,हर युग में समदेने का दमसदा ही भरे ।जन-जन का प्रेमीप्रकृति से नेमी,प्रतिशोधो से परेनिरन्तर दे रहा सन्देशदेना सीखो-विष पीके भीजीना सीखोदीर्घायु तक-मेरी तरहरहोगे - रश्मि'तुम - हरे भरे ।
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3 टिप्‍पणियां:

Ritika ने कहा…

Kya aap paryavaran par kavita bhej sakte hain??

natasha ने कहा…

yo man paryavarran is boring topic i can give a poen on hollywood stars

khushi Rawal ने कहा…

o please yaar it is really boring..