शुक्रवार, 17 मार्च 2017

प्रसंगवश
नदियों के संरक्षण से बच सकती है, संस्कृति 
शिवराजसिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
    विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के तट पर ही विकसति हुई  है । नर्मदा घाटी भी इसका अपवाद नहीं है । नर्मदा घाटी का सांस्कृतिक इतिहास  गौरवशाली रहा है । माँ नर्मदा का आसपास की धरती को समृद्ध बनाने में बहुत योगदान रहा है । नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवन-रेखा कहा जाता है । माँ नर्मदा को भारतीय संस्कृृति में मोक्षदायिनी, पापमोचिनी, मुक्तिदात्री, पितृतारिणी और भक्तों की कामनाआें की पूर्ति वाले महातीर्थ का भी गौरव प्राप्त् है ।
    नमामि देवि नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा अभियान इतिहास की उसी परम्परा का पुनर्जीवन है, जो कि प्रदेश के नागरिकों को माँ नर्मदा के ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक पहलुआें से परिचित करायेगी ।
    मुझे इस बात प्रसन्नता है कि आज नमामि देवि नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा अभियान एक जन आंदोलन बन गया है । सभी लोग बड़े उत्साह और उमंग के साथ दुनिया के सबसे बड़े नदी संरक्षण अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं ।
    माँ नर्मदा भविष्य में प्रदूषित न हो इसलिये हमने फैसला लिया है कि १५ शहरों के दूषित जल को नर्मदा मेंनहीं मिलने देंगे । इसके लिये हम १५०० करोड़ रूपये की राशि से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट लगा रहे हैं । नर्मदा नदी के तट के सभी गाँवों और शहरों को खुले में शोच से मुक्त किया जायेगा । नर्मदा नदी के दोनों और बहने वाले ७६६ नालों के पानी को नर्मदा में जाने से रोकने से सुनियोजित प्रयास किये जायेगे । नदी के दोनों ओर हम सघन वृक्षारोपण करेंगे ताकि नर्मदा में जल की मात्रा बढ़ सके । नर्मदा के तट पर स्थित गाँवों और शहरों में ५ कि.मी. की दूरी तक शराब की दुकानें नहीं होगी । सभी घाटों पर शवदाह गृह, स्नानागार और पूजा सामग्री विसर्जन कुण्ड बनाये जायेगे ताकि माँ नर्मदा को पूर्णत: प्रदूषण रहित रखा जा सके । मेरे विचार से हमें नदियों के महत्व को समझते हुए पूरी दूनिया में नदियों को बचाने के लिये लोगों को जागरूक करना चाहिये ।

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