मंगलवार, 3 जून 2008

९ स्वास्थ्य

पर्यावरण एवं श्वासपैथी
कृष्णांश अश्वनी अग्रवाल
यह बात प्रत्येक प्राणी अच्छी तरह से जानता है कि सांस से ही जीवन चलता है । योगी तो सांस ही को प्राण मानते है । पिछले दिनांेटाईम क्लॉक म्युजियम एवं रिसर्च सैंटर नई दिल्ली की टीम ने नाड़ीज्ञन ४ आल के सहयोग से इस विषय पर विचार करके एक प्रोजेक्ट श्वासपैथी : बीमारियों से लड़ाई, बिना किसी पर र्निभर हुए पर कार्य प्रारंभ किया। इस प्रोजेक्ट में एक विचार, क्या एक चीज़ जो जीवन चलाता है शरीर को स्वस्थ नहीं कर सकता को केन्द्र में रखा गया है । सबसे पहले क्या श्वास प्रक्रिया अपने आप चलती है या यह प्राणी के नियंत्रण में आती है । और यह पाया गया कि हृदय की धड़कन की प्रक्रिया तो स्वत: कम यहंा तक कि शून्य तक ले जाते थे पर हम अभी तक किसी भी ऐसे प्राणी से मिल नहीं पाए । लेकिन श्वास प्रकिे्रया एक ऐसी प्रक्रिया है जो निश्चित रुप से पूर्णतया प्राणी के नियंत्रण में है । और यह बात हमने अपने ऊपर प्रयोग करके विवेचना करके हर प्रकार से पक्का सिद्ध कर लिया । इस निर्णय के बाद प्रोजेक्ट की दिशा र्निधारित हो गई। एक पुस्तिका ``वयस्कता की और बढ़ते कदम'' में लंग्स एफीशीयेन्सी नामक लेख पढ़ने को मिला जिसमें संक्षेप में फेफड़े के उपयोग व उसकी कार्य प्रणाली तथा क्षमता के बारे में जानकारी दी गई है । और इसी में क्षमता नापने तथा उसे बढ़ाने की सलाह भी दी गई है । यहॉ प्रश्न उठा कि फेफड़े की कार्य क्षमता को कैसे बढ़ाया जा सकता है । उसका उत्तर योग व प्राणायाम की पुस्तक में मिल गया। कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए आपको सिर्फ अपने सांस लेने व छोड़ने के समय को लगातार बढ़ाते जाना है । याद रखें सांस लेने का समय व छोड़ने का समय लगभग बराबर होना चाहिए । और जैसे जैसे फेफड़ो की कार्य क्षमता बढ़ती जाएगी वैसे वैसे आप अपने आप ही रोगों से छुटकारा पाते चलें जाते है । यानि बिना दवाई के रोग से मुक्ति और बिना किसी फालतु प्रयास के क्योंकि सांस तो प्राणी हर समय लेता है । मात्र ध्यान रखना है कि ठीक से लेन देन करना है । ऐसे सिस्टम व उपकरण उपलब्ध है जो इस कार्य में आपकी सहायता कर सकते है । जैसे शंख बजाओ टैस्टर, अग्रसेन व्यवस्था डेमोन्स्ट्रेट आदि । क्षमता बढ़ाने में स्वास्थ वायु का होना भी बहुत आवश्यक है जो कि सिर्फ वृक्ष ही प्रदान कर सकते है । हम सब जानते है सांस प्रक्रिया में आक्सीजन का प्रयोग रक्त में उपस्थित कार्बन को जला कर कार्बन डाई ऑक्साईड में परिवर्तित करना और फिर शरीर से बाहर कर देना होता है । इसी प्रकार वृक्ष भी करते है परंतु वृक्षो की भोजन पाचन प्रक्रिया प्राणी की पाचन प्रक्रिया में सिर्फ एक भेद है । प्राणी जगत आक्सीजन का उपयोग करता है और कार्बन डाई आक्साईड उत्सर्जित करता है और वनस्पति जगत कार्बन डाई आक्साईड का उपायोग करके सूर्य की उपस्थिति में आक्सीजन का उत्सर्जन करता है । फेफडो की कार्य क्षमता बढ़ाने से न सिर्फ आप अपने आप को स्वस्थ करते है बल्कि वातावरण में प्रदूषण को भी कम करते है क्योंकि सारे प्राणी जगत में सांस प्रक्रिया का नियंत्रण सिर्फ मनुष्यों के लिए हीं संभव हैं । सांस लेते समय जितना अधिक समय लगाएगें उतना ही अधिक आक्सीजन का प्रयोग होगा और सांस छोड़ते हुए जितना अधिक समय लगा देंगे उतना ही अधिक कार्बन अपने शरीर से बाहर फैंक पाएगें और इस से कम वृक्ष होने के बावजूद भी वातावरण अधिक स्वच्छ होगा जो प्रत्येक प्राणी को लाभ पहुॅचाएगा । पर्यावरण का महत्व श्वासपैथी में ेकितना है यह समझना सरल है और श्वासपैथी को कामयाब बनाने से आप पर्यावरण की सुरक्षा में भागीदार अवश्य बनेंगे । ***

2 टिप्‍पणियां:

Praani ने कहा…

very informative , need more information on this.

nidhi ने कहा…

really useful and may help a lot if implemented