शनिवार, 15 दिसंबर 2007

१० ज्ञान विज्ञान

नई तकनीक से विकसित होगा हाइड्रोजन इंर्धन

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए यह खबर राहतभरी है । अब उन्हें वाहन चलाने के लिए पेट्रोल-डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें इंर्धन के रूप में भरपूर मात्रा में हाइड्रोजन गैस मिलेगी । इससे न सिर्फ प्रदूषण कम होगा बल्कि पेट्रोल-डीजल के मुकाबले इसके सस्ते होने के दावे भी किए जा रहे हैं । अमेरिकी वैज्ञानिकों ने जैविक पदार्थो से हाइड्रोजन गैस तैयार करने की तकनीक विकसित कर ली है । इसके जरिए प्रचुर मात्रा में हाइड्रोजन गैस तैयार की जा सकती है । नई तकनीक में हाइड्रोजन गैस बनाने के लिए सैल्यूलोज और ग्लेकोज जैसे बायोमास का प्रयोग किया जाएगा । जिसका उपयोग वाहन चलाने, फर्टिलाइजर बनाने और पीने के पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए किया जा सकेगा । इन दिनों दुनियाभर के वाहनों में प्रदूषण रहित इंर्धन का चलन बढ़ रहा है। इसके लिए हाइड्रोजन से चलने वाले इंजिन तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल समस्या यह है कि हाइड्रोजन भरपूर मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण इसका चलन भी कम है । अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इसी दिशा में काम किया और जैविक पदार्थो से हाइड्रोजन गैस तैयार कने की तकनीक विकसित कर ली । पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने इस तकनीक का परीक्षण कर लिया है । जो इलेक्ट्रॉन पैदा करने वाले बैक्टीरिया और छोटे इलेक्ट्रिकल चार्ज को माइक्रोबायल फ्यूल सेल के संपर्क से हाइड्रोजन पैदा करती है ।

पक्षियों के माफिया



यह तो आपने भी सुना होगा कि कोयल घोंसला नहीं बनाती है और कौवे के घोंसले में अण्डे देती है । पता नहीं, यह सवाल आपके मन में आया या नहीं कि कौवे यह सहन क्यों करते हैं । वैज्ञानिकों को जरूर यह सवाल परेशान करता रहा है। जैसे कोपनहेगन विश्वविद्यालय के एण्डर्स पेप मोलन ने काफी पहले यह पता लगाया था कि बड़े धब्बों वाली कोयलें (क्लेमेटॉर ग्लैण्डेरियस) एक तरह का माफिया चलाती हैं । स्पेन में किए गए इस अध्ययन से पता चला था कि ये कोयलें अपने अण्डे मैगपाई के घोंसले में देती हैं और यदि मैगपाई इन अण्डों को न रखें, तो कोयलें लौटकर मैगपाई के अण्डे या चूज़े नष्ट कर देती हैं। अब पता चला है कि अमरीकी काऊबर्ड तो इन कोयलों से भी ज्यादा खतरनाक हैं । इलियॉन नेचुरल हिस्ट्री सर्वे के जेम्स हूवर करीब चार वर्षो से ब्राउन हेडेड काऊबड्र्स (मोलोथ्रस एटर) का अध्ययन करते रहे हैं । ये काऊबड्र्स अपने अण्डे वार्बलर नामक पक्षी के घोंसलों में देती है । आम तौर पर माना जाता था कि वार्बलर पहचान नहीं पाती कि ये अण्डे उसके नहीं है और चुपचाप उनको सेती रहती थी । मगर हूवर व स्कॉट रॉबिसंन ने इस बात की जांच की तो नतीजे हैरतअंगेज रहे । अध्ययन करने के लिए हूवर व रॉबिसन ने वार्बलर्स को १८० कृत्रिम घोंसले प्रदान कर दिए । कुछ समय बाद काऊबड्र्स ने आकर अपने अण्डे इन घोंसलों में दिए । हूवर और रॉबिसन ने इन्हें हटा दिया । अण्डे हटाने की देर थी और काऊबड्र्स ने जबर्दस्त हमला किया । उन्होंने घोंसलों में शेष बचे वार्बलर अण्डे नष्ट कर डाले । और तो और, कुछ वार्बलर्स ने यह होशियारी दिखाई थी कि बहुत जल्दी अण्डे दे दिए थे ताकि काऊबर्ड द्वारा कब्जा किए जाने से पहले ही उनके चूजे निकल आएं । काऊबर्ड ने इन अण्डों को भी तबाह करके वार्बलर्स को मजबूत कर दिया कि वे फिर से अण्डे दें औरइसके बाद वे वार्बलर पक्षियों की जासूसी करते रहे कि वे कहां जाकर फिर से घोंसला बनाते हैं ताकि सही समय पर अपने अण्डे भी वहीं जाकर दे सकें । इस प्रक्रिया का परिणाम यह होता है कि काऊबर्ड को संतानोत्पत्ति के अवसर मुफ्त में मिलते हैं । लगभग २० प्रतिशत वार्बलर घोंसलों में इन काऊबड्र्स ने अण्डे दिए और नए बनाए गए घोंसलों में से भी ८५ प्रतिशत में अण्डे दिए थे । इस माफियागिरी के चलते वार्बलर के लिए समर्पण कर देना ही बेहतर होता है । देखा गया कि यदि वे काऊबर्ड के चूजे को पाल लें तो उनके अपने औसतन तीन चूजे जीवित रहते हैं। दूसरी ओर, यदि वे काऊबर्ड के अण्डे को अस्वीकार कर दें तो उनका मात्र एक चूजा ही बच पाता है । हूवर अब कोशिश कर रहे हैं कि इस पूरी प्रक्रिया की फिल्म बनाए ताकि इसे बारीकी से समझा जा सके और यह सवाल तो है ही कि क्या कोयलें भी कौआे के साथ ऐसा ही व्यवहार करती हैं ।
लखटकिया साइकल की दस्तक


टाटा की लखटकिया कार के ऐलान के बाद अब लाख टके की साइकल की बारी है । कीमत बेशुमार होने के बावजूद इसे बनाने वाली कंपनी कोइसकी सफलता पर पूरा भरोसा है । कंपनी का मानना है कि आने वाला वक्त पेट्रोल नहीं, पेडल से चलने वाले टू-वीलरों का होगा । इसकी कीमत १ लाख ६ हजार रूपये है । घरेलू कंपनी फायरफॉक्स बाइक्स प्राइवेट लिमिटेड ने फ्यूल एक्स ८ बाइक नाम की यह साइकल पेश की है । कंपनी अमेरिका में स्थित अपनी सहयोगी कपंनी ट्रेक के माध्यम से इसे सोर्स करेगी । फायरफॉक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर शिव इंदरसिंह ने बताया कि काफी सीरियस बाइकर्स को ध्यान में रखकर साइकल के इस मॉडल को लॉन्च किया गया है । उन्होंने बताया कि इस प्रॉडक्ट के बारे में शुरूआती रिस्पॉन्स काफी उत्साहजनक रहा है । कंपनी को पहले ही ३ ऐसी साइकल के ऑर्डर प्राप्त् हो चुके हैं । इस साइकल में स्पोट्र्स फीचर मौजूद हैं । मसलन इसमें हाइड्रोलिक और गैस से भरे हुए शॉक एबजॉर्बर, डिस्क ब्रेक जैसे विकल्प मुहैया कराए गए हैं । इसके अलावा २७ गीयर भी होंगे । श्री सिंह ने कहा कि इसे शहरी बच्चें को ध्यान में रखकर बनाया गया है । ये बच्चें में पश्चिमी मुल्कों के लाइफस्टाइल को खासा पसंद करते हैं । चूंकि ऐसे बाइक पश्चिमी देशों में काफी हिट हैं, लिहाजा हमें भारत में भी अच्छे रिस्पॉन्स मिलने की उम्मीद है । उन्होंने बताया कि कंपनी वर्तमान टारगेट १२ हजार यूनिट की बिक्री करने का है । २०११ तक इसे बढ़ाकर ६० हजार यूनिट करने का लक्ष्य है । नए मॉडल कंपनी के सभी २२ आउटलेट्स पर उपलब्ध होंगे । उन्होंने बताया कि भारत में साइकल का कुल बाजार तकरीबन १.५ करोड़ डॉलर (तकरीबन ६० करोड़ रूपये) का है । इसका ५ से ७ फीसदी हिस्सा अलग किस्म के साइकल्स के लिए है । यह साइकल सिर्फ आर्डर पर ही उपलब्ध होगी । ऑर्डर के ३ हफ्ते के भीतर इसे ग्राहक को मुहैया करा दिया जाएगा । सिंह ने कहा कि शुरू में कंपनी इस साइकल को दिल्ली स्थित अपने आउटलेट्स में ही पेश करेगी । बाद में इसे अन्य महानगरों में भी पेश किया जाएगा । हालांकि फिलहाल इस प्रॉडक्ट के ऑल इंडिया लॉन्च की संभावना नहीं है । मेट्रो शहरों में रिस्पॉन्स के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा ।
गंध से शत्रु को पहचान लेते हैं हाथी
हम इंसान भले ही अपने मित्र या शत्रु को पलचानने में धोखा खा जाएं, लेकिन हाथी इसमें बड़े उस्ताद होते हैं । वे किसी मनुष्य के कपड़े के रंग या गंध से भी यह अनुमान लगा लेते हैं कि अमुक व्यक्ति उनका मित्र है या शत्रु । गंध के अलावा इस बात का भी अध्ययन किया गया कि हाथी रंग से जुड़े संभावित खतरे को पहचान पाते हैं अथवा नहीं । इसके लिए उन्हें सफेद व लाल रंग के कपड़े दिखाए गए । सफेद रंग के प्रति तो वे शांत रहे, लेकिन लाल रंग को देखते ही भड़क गए । मनोवैज्ञानिक इस अध्ययन से काफी उत्साहित हैं । उनका कहना है कि यह संभवत: ऐसा पहला मौका है जब किसी जानवर ने एक ही प्रजाति के अपने शिकारी के खतरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया हैं ।

कोई टिप्पणी नहीं: